मौनी अमावस्या 2026: मौन व्रत टूट जाए तो क्या करें? जानें दोष मुक्ति के उपाय

मौनी अमावस्या 2026 इस वर्ष 18 जनवरी, रविवार को पड़ रही है। यह दिन हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और मौन व्रत का पालन करते हैं। विशेष रूप से मौन व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसमें व्यक्ति पूरे दिन या स्नान तक पूर्ण रूप से मौन रहने का संकल्प लेता है।

लेकिन कई बार भूलवश या परिस्थितिवश एक शब्द भी मुख से निकल जाए, तो व्यक्ति के मन में यह प्रश्न उठता है कि “क्या मौन व्रत टूटने से दोष लगता है?” और “उस दोष से मुक्ति कैसे पाएं?” आइए जानते हैं इसका उत्तर।

मौन व्रत क्या है और इसका उद्देश्य

मौन व्रत का मुख्य उद्देश्य केवल न बोलना नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, मन की शुद्धि और ईश्वर से आत्मा का जुड़ाव है। मौन रहकर व्यक्ति अपने जीवन, उद्देश्य, कर्म, करियर और आध्यात्मिक प्रगति पर विचार करता है।

मौन व्रत के दौरान:

  • मानसिक रूप से मंत्र जाप किया जाता है

  • अपने इष्ट देव का स्मरण किया जाता है

  • अंतर्मन की यात्रा और आत्मविश्लेषण किया जाता है

मौनी अमावस्या पर मौन व्रत के प्रकार

काशी के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट के अनुसार मौन व्रत मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:

1. स्नान तक का मौन व्रत (सरल)

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर

  • दैनिक क्रिया से निवृत्त होकर

  • बिना कुछ बोले स्नान करना

2. पूरे दिन का मौन व्रत (कठिन)

  • सूर्योदय से सूर्यास्त तक

  • पूर्ण मौन का पालन

  • केवल मानसिक जप और साधना

मौन व्रत टूट जाए तो क्या दोष लगता है?

यदि आपने संकल्प लिया है और अनजाने में भी मौन व्रत टूट जाए, तो शास्त्रों के अनुसार दोष माना जाता है। लेकिन घबराने या अत्यधिक ग्लानि करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इसका सरल समाधान भी बताया गया है।

मौन व्रत टूटने पर दोष निवारण के उपाय

यदि मौनी अमावस्या के दिन आपका मौन व्रत टूट जाए, तो नीचे दिए गए उपाय अवश्य करें:

1. दान करें (विशेष उपाय)

  • काले तिल का दान सबसे प्रभावी माना गया है

  • इसके अलावा आप कर सकते हैं:

    • सप्तधान्य

    • अन्न

    • वस्त्र

    • फल

दान किसी जरूरतमंद, ब्राह्मण या मंदिर में करें।

2. भजन-कीर्तन करें

मौन व्रत टूटने के बाद मन में जो ग्लानि या कष्ट होता है, उसका निवारण भजन-कीर्तन से होता है। अपने मुख से ईश्वर का गुणगान करें।

3. मंत्र जाप करें

  • यदि आपने किसी गुरु से दीक्षा ली है, तो गुरु मंत्र का जाप करें

  • अपने इष्ट देव के नाम का जप करें

  • या फिर कोई भी ऐसा मंत्र चुनें, जिससे आपको मानसिक शांति मिलती हो

मंत्र जाप से मन शांत होता है और दोष का प्रभाव कम होता है।

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